Monday, January 19, 2009

टेंशन,डिपरैशन,अनिद्रा,ह्र्दय रोग की अचूक दवा है सत्य बोलना.


सदियॉ से कहा जाता रहा है के सदा सत्य बोलना चाहिए, सत्य का व्यवहार करना चाहिए. पौराणिक कथाऑ मॅ भी सत्य की असत्य पर विजय की ही गाथा गाई हुई है. भारत के प्रतीक चिन्ह का अभिन्न हिस्सा है,”सत्यमेव जयते” यह वाक्य. आखिर क्यॉ? क्या होता है सत्य? क्यॉ सत्य की इतनी महिमा गाई गई है? आज का मानव भिन्न प्रकार के मनोरोगॉ के जाल मॅ उलझा हुआ है.कही उसकी काट सत्य की पहेली मॅ ही तो नही!! राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जीवन मॅ सत्य का जो स्थान रहा वो किसी से छिपा नही है. तो प्रश्न यह है कि आखिर सत्य कहने, सत्य सुनने, सत्य से ओत-प्रोत जीवन जीने मॅ ऐसा क्या है? एक लोकोक्ति है- सत्य कहने और सुनने वाला- ये दोनॉ ही दुर्लभ होते है.जिस योग के बूते स्वामी रामदेव जी आज सकल विश्व मॅ चर्चित है उस योग पद्धित के प्रणेता, अष्टांग योग सिद्धांत के प्रवर्तक योगर्षि पतंजलि ने भी आत्मिक शुद्धि के लिए जो यम-नियम दिये उनमॅ सत्य का स्थान सर्वोच्च है. कहा गया है कि सत्य तप है. अर्थार्थ तपाने वाला है. सत्य बोलने, सत्य का आचरण करने से आत्मबल, आत्मविश्वास बढता है. एक सत्य कह देने से हज़ार झूठ नही बोलने पडते. बेकार के तनाव से मुक्ति मिल जाती है. मन साफ रहता है. व्यक्ति व्यर्थ कि बातॉ से भयग्रस्त नही रह्ता. मन मॅ प्रेम उत्पन्न होता है. अकारण तनाव नही होता. बी.पी. ठीक रहता है. छोटी-मोटी बातॉ से व्यकित बौखलाता नही, बल्कि उनका समाधान बड़ी सरलता से कर पाता है क्यॉकि व्यक्ति शांत होता है. उसके परिवार मॅ, समाज मॅ सभी रिश्ते भली प्रकार पनपते है. व्यक्ति समाज के लिये उपयोगी बन जाता है. वह सहयोगी हो जाता है. जीवन मॅ स्थिरता आ जाती है. शरीर मॅ रोग नही पलते क्योकि वह ऊर्जावान रहने लगता है. रक्त मॅ लाल रक्त कणिकाऍ बढ जाती है. शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मॅ वृद्धि होती है. दवा-दारू मॅ लगने वाला पैसा बच जाता है. संतुलित मन होने के कारण व्यक्ति सही-ग़लत मॅ अंतर करने मॅ अधिक सक्षम हो जाता है. परिवार का विकास होता है. नई पीढी मज़बूत होती है. उसका जीवन स्तर ऊचा हो जाता है. बनावटीपन नही रहता. तो तनाव नही होता. चेहरे की त्वचा दमक उठती है. व्यक्ति चिर-युवा रहता है. टॅशन, डिप्रेशन, मोटापा, ह्र्दय रोग, चर्म रोग, पेट के रोग व अनिद्रा ये सब बिमारियाँ पास भी नही फटकती. तो अब आप ही बताइए की सही कहा गया है ना कि सदा सच बोलना चाहिए. तो आज से ही तय करॅ कि स्वमं तो सत्य को धारण करॅगे ही साथ ही आपने छोटॉ को भी सच्चाई से जीने के लिये उत्साहित करॅगे. क्यॉकि सत्यम-शिवम-सुन्दरम.

3 comments:

अविनाश वाचस्पति said...

सत्‍य बोल कर
सत्‍यम का जो
हश्र हुआ
उससे किसी को
न हर्ष हुआ
बहुतों की
उड़ गई नींद
दवा दारू
न बन सकी।

मनुदीप यदुवंशी said...

अविनाश जी क्यॉकि अपने राजू भैया ने सत्य का आचरण नही किया ना. इसी लिये तो कहा है मैने कि सत्य बोलो. सुखी रहो.

nitin said...

Jhoot kabhi sach sey balwan nahi ho sakta. ek or khas bat. "SACH THAKTA JAROOR HAI LAKIN KABHI HARTA NAHI HAI." sach darawna or kadwa kewal esley hota hai keyoki wah apne vastvik roop mey hota hai jabki jhoot chamkdar esley hota hai keyoki usko es tharha tyar keya jata hai taki sabko pasand aye. Jai Hind. Nitin Sabrangi. Journalist&Writer. meerut.

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